
जोधपुर. हाईकोर्ट में सोमवार को गुढ़ामालानी के अस्पताल के पीपीपी मोड पर किए गए एमओयू निरस्त करने के मामले में सुनवाई हुई। कोर्ट के ध्यान में लाया गया कि अस्पताल में पुरुष जीएनएम डिलीवरी कर रहे हंै। इसे कोर्ट ने शर्मनाक बताते हुए मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, कि महिलाओं की मर्यादा होती है। क्यों न इसे महिला आयोग के संज्ञान में लाया जाए। कोर्ट ने इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने तथा एमओयू को री-कंसीडर करने के निर्देश दिए। चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त सचिव वीनू गुप्ता भी पेश हुईं। इस मामले में अगली सुनवाई 27 सितंबर को मुकर्रर की है। याचिकाकर्ता सीआरडी हेल्थ केयर की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ जोशी ने बहस करते हुए कहा कि सरकार द्वारा गुढ़ामालानी के अस्पताल का पहले तो पीपीपी मोड पर एमओयू कर दिया गया। बाद में सरकार ने एमओयू को निरस्त कर दिया। पीपीपी मोड पर देने के बाद याचिकाकर्ता ने 45 लाख रुपए लगाकर अस्पताल में कई सुधार किए। खाली पदों को भरा गया तथा 11 महीने में 30 ऑपरेशन भी किए। एमओयू निरस्त होने के बाद हालात फिर से खराब होने लग गए...
आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
from दैनिक भास्कर https://ift.tt/2N1fpS9
No comments:
Post a Comment